लक्ष्य
राही है तू राह से प्रेम न कर निमित है तू स्वयं पर इतना गरुर न कर राह कठिन है मगर स्वयं को तू निराश न कर मंजिल मिलेगी यकीनन साहस को तू कमजोर न कर उठ गया है पांव तेरा छूट गया है गांव तेरा लक्ष्य है दूर सही राह है कंटक भरी संकल्प है अडिग तेरा पूर्ण होगा स्वप्न तेरा उच्च कोटि लक्ष्य तेरा जानता है जग सारा ढूंढ़ रहा हैं ठांव कोई अवश्य मिलेगी छांव कोई तेरा लक्ष्य सरल नहीं तपस्या बिना हल नहीं माना है तेरा लक्ष्य मुश्किल पर यह तो है अभी शुरुआत जीवन चले सहज सरल तुझे यह कहां पसंद घनघोर अंधेरा है संकेत रोशनी का है संदेश यह नहीं है कोई अंत अभी तो बाकी आधा पथ आराम का तू व्यवधान न पाल अपनी तपस्या व्यर्थ न कर बिन तपस्या न मिला लक्ष्य कोई ऐसा ना हुआ ना होगा कभी स्वयं पर तू कर यकीन इतना भी ना लक्ष्य कठिन मंजिल मिलेगी यकीनन साहस को तू कमजोर न कर ✍️ सुरेन्द्र कुमार बिश्नोई


