संघर्ष
तम का है डर कहां हर दिन सूर्य निकलता है
पतझड़ के बाद ही तो नई कोपल फूटता है
संघर्ष ही तो जय का आनन्द सिखलाता है
छोटी सी चिंगारी से ही दावानल फूटता हैं
तम का है डर कहां हर दिन सूर्य निकलता है
सूतपुत्र का संघर्ष देखो अंगराज कहलाता है
गोकुल गोपाल को संघर्ष ही श्रीकृष्ण बनाता है
संघर्ष ही श्रीराम को पुरूषोतम बनाता है
तम का है डर कहां हर दिन सूर्य निकलता है
हर बूंद का है महत्त्व बूंद बूंद से घड़ा भरता है
प्रताप के संघर्ष को इतिहास महाराणा बतलाता है
संघर्ष से ही हर दानवीर भामाशाह कहलाता है
संघर्ष ही मीरा को भक्तशिरोमणि बनाता है
तम का है डर कहां हर दिन सूर्य निकलता है
✍️ सुरेन्द्र कुमार बिश्नोई


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