खाली आसमां

यह घनघोर अंधेरी रात हैं,

तेरे हुनर की यहां पहचान हैं।

बन के चंदा, चल आ जरा।

खाली है आसमां, चल छा जरा।


फिर कल सूर्य निकलेगा,

फिर कौन तुम्हें पूछेगा?

वक्त केवल यही तेरा,

चल तरास हुनर अपना।


ना हो निराश, देख इन तारों को,

कोशिश पूरी करते हैं,

चाहे ना हो सफल,

कर्म पर अडिग रहते हैं।


समय चक्र फिर घूमेगा और बदलेगा वक्त,

सूर्य भी कहां निभाएंगा प्रतिक्षण साथ,

देखना कल फिर होगी वही घनेरी रात,

और खाली आसमां।


           ...✍🏻 सुरेन्द्र कुमार बिश्नोई 🦅

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