नववर्ष का जश्न
कैसे मनाएं नववर्ष का जश्न
दर्द से तड़प रहा किसान
नाकाम रही सरकार और प्रशासन
कैसे मनाएं नववर्ष का जश्न
ना कोई सरहद इन्हें रोके
चली आयी ना जाने कहां से
किसान का दर्द कौन समझे
नेता आये राजनीति जमाये
प्रशासन नित नए बहाने बनाते
भूमिपुत्रों का दर्द ना समझते
टीड्डी दल का आसमां में उठा कोई बवंडर
जहां तक जाए नजर बर्बादी का ही मंजर
हैरान परेशान किसान की बर्बादी पर
कैसे मनाएं जश्न नववर्ष का अपनी ही बर्बादी पर
धरती का सीना चीर निपजता अन्न हूं
कड़ी धूप सहता ठंठ में ठिठुरता हूं
हर मुंह तक निवाला मैं पहुंचाताहूं
किसान का दर्द बयां करता मैं भी एक किसान हूं
✍️ सुरेन्द्र कुमार बिश्नोई


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